‘मिस्‍टर बैकहैंड’ गुरजंत सिंह का हॉकी से संन्‍यास:सबसे तेज गोल का रिकॉर्ड, अर्जुन अवॉर्ड से सम्‍मानित; नाम पर स्‍कूल खुला, जानें प्रोफाइल

इंडियन हॉकी प्लेयर गुरजंत सिंह ने इंटरनेशनल हॉकी से रिटायरमेंट का ऐलान किया। इसकी घोषणा उन्होंने 27 मार्च को दिल्ली के ला मेरेडिएन में आयोजित हॉकी इंडिया एनुअल अवॉर्ड सेरेमनी के दौरान की, जिसके बाद से ही वे चर्चा में हैं। गुरजंत नेशनल हॉकी टीम में फॉर्वर्ड प्लेअर हैं। लगभग एक दशक के अपने शानदार करियर में उन्होंने दो गोल्ड मेडल- 2022 एशियन गेम्स (हांगझोऊ) और 2016 जूनियर विश्व कप (लखनऊ) में जीते हैं। इसके अलावा, वे टोक्यो 2020 और पेरिस 2024 ओलिंपिक में ब्रॉन्ज जीतने वाली टीम का हिस्सा रहे हैं।
2005 में चंडीगढ़ हॉकी एकेडमी जॉइन की गुरजंत ने एक इंटरव्यू में कहा था कि बटाला में पहली बार अपने भाइयों को हॉकी खेलता देख बहुत खुशी हुई थी, तभी उन्होंने तय कर लिया कि हॉकी खेलना है। जल्द ही हॉकी के बारे में सब पता किया और 2005 में चंडीगढ़ हॉकी एकेडमी जॉइन कर ली। 2011 तक वहां और फिर जालंधर के सूरजित हॉकी एकेडमी में ट्रेनिंग ली। जल्द ही हॉकी के डोमेस्टिक सर्किट में अपने प्रदर्शन के लिए मशहूर होने लगे। इस बीच पंजाब और हरियाणा के लिए कई टूर्नामेंट्स जीते। 2016 में FIH जूनियर मेन्स वर्ल्ड कप में गोल्ड जिताया गुरजंत ने साल 2016 के इंटरनेशनल हॉकी फेडरेशन (FIH) जूनियर मेन्स वर्ल्ड कप की टीम में अपनी जगह बनाई और ट्रेनिंग के लिए बेंगलुरु के SAI एकेडमी गए। हॉकी इंडिया के मुताबिक, 2015 में नीदरलैंड्स में आयोजित अंडर-21 सिक्स नेशंस टूर के लिए चुना गया था। वे ऑस्ट्रेलियन हॉकी लीग में भी भारतीय टीम का हिस्सा रहे। उसमें उनके प्रदर्शन को देखते हुए लखनऊ में आयोजित मेंस हॉकी जूनियर वर्ल्ड कप 2016 के लिए चुना गया। इसमें टीम और उनकी बेहतरीन पर्फॉर्मेंस ने भारत को वर्ल्ड कप में गोल्ड जिताया। गुरजंत अपने एक इंटरव्यू में कहते हैं, ‘मैं 18 दिसंबर 2016 का वो दिन कभी नहीं भूलूंगा। उस दिन हमने जूनियर वर्ल्ड कप का खिताब जीता था और अब तक यह मेरे करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि रही है। इस शानदार जीत के बाद ही लोगों ने मुझे नोटिस करना शुरू किया।’
जर्मन खिलाड़ी ने ‘मिस्टर बैकहैंड’ नाम दिया इसी वर्ल्ड कप में गुरजंत ने अपने दूसरे गोल में एक बेहतरीन टोमहॉक यानी रिवर्स स्टिक शॉट खेला था। इस शानदार गोल के लिए जर्मनी के दिग्गज हॉकी खिलाड़ी फ्लोरियन फुच्स ने उन्हें ‘मिस्टर बैकहैंड’ निकनेम से बुलाना शुरू कर दिया। गुरजंत ने सीनियर टीम के लिए अपना पहला मैच 2017 में बेल्जियम के खिलाफ खेला था। उसी साल ढाका में आयोजित हीरो एशिया कप भी भारत ने जीता था। गुरजंत उस टीम का भी हिस्सा थे। हालांकि, इस शानदार शुरुआत के बाद उनका फॉर्म कुछ बिगड़ा था, जिसकी वजह से 2018 के कॉमन वेल्थ और एशियन गेम्स में उन्हें इंडियन स्क्वॉड में जगह नहीं मिली।
फास्टेस्ट गोल का रिकॉर्ड अपने नाम किया चोट के कारण FIH मेन्स वर्ल्ड कप स्क्वॉड में भी जगह नहीं मिली। उसी साल मस्कट में आयोजित एशियन चैम्पियंस ट्रॉफी में चुने गए, जिसमें उन्होंने 5 गोल किए। हालांकि, इसके बावजूद भी वो टीम में अपनी जगह नहीं बना पाए और बेहतर परफॉर्म नहीं कर पाए। जनवरी 2020 में FIH प्रो लीग में नीदरलैंड्स के खिलाफ पहले 13 सेकेंड में सबसे तेज गोल किया। इसके साथ ही वे इंटरनेशनल मैच में सबसे तेज गोल करने वाले भारतीय खिलाड़ी बन गए। 2020 में इस गोल को फैंस ने FIH प्रो लीग का सेकेंड बेस्ट गोल वोट किया था। 41 साल बाद ओलिंपिक जीतने वाली टीम का हिस्सा रहे गुरजंत टोक्यो ओलिंपिक 2020 में 41 साल बाद ऐतिहासिक पदक जीतने वाली टीम का भी हिस्सा रहे। इसके बाद 2024 में पेरिस ओलिंपिक में इंडिया को बैक-टू-बैक दो ब्रॉन्ज मेडल जिताने वाली टीम का हिस्सा रहे। पंजाब सरकार ने 2024 में PCS अपॉइंट किया 2021 में पंजाब सरकार ने गांव के गवर्नमेंट प्राइमरी स्कूल का नाम ‘ओलिंपियन गुरजंत सिंह गवर्नमेंट प्राइमरी स्कूल’ रखा दिया। ऐसा 2020 टोक्यो समर ओलिंपिक्स में गुरजंत के प्रदर्शन के सम्मानित करने के लिए किया। इसके साथ ही पंजाब सरकार ने 2024 में इंडियन हॉकी में उनके योगदान के लिए पंजाब का PCS ऑफिसर अपॉइंट किया। स्टोरी – सोनाली राय ——————– ये खबरें भी पढ़ें… UPSC प्रिपरेशन के लिए बड़े शहर जाना जरूरी नहीं: मोबाइल, इंटरनेट डिस्‍ट्रैक्‍शन नहीं, तैयारी के टूल्‍स; AIR 137 ने सेल्‍फ स्‍टडी से क्रैक किया IPS 6 मार्च को जारी UPSC सिविल सर्विस 2025 रिजल्ट्स में हरियाणा की मानसी डागर ने 137वीं रैंक हासिल की। ये रैंक उन्होंने बिना किसी कोचिंग और प्रोफेश्नल गाइडेंस के सिर्फ सेल्फ स्टडी से हासिल की। पूरी खबर पढ़ें…

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