2 महीने में 8 बच्चों ने किया सुसाइड:स्कूल-बुलिंग, टीचर्स ने किया हरेस, स्ट्रेस ने ली जान; बच्चों में बढ़ रही मेंटल हेल्थ इमरजेंसी को समझिए

महाराष्ट्र के जालना जिले में 21 नवंबर यानी शुक्रवार को 7वीं कक्षा की 13 साल की एक छात्रा ने स्कूल की तीसरी मंजिल से कूदकर अपनी जान दे दी। छात्रा का नाम आरोही दीपक बिडलान है। पिता का आरोप है कि- आरोही रोजाना की तरह स्कूल गई थी। वो कुछ दिनों से स्ट्रेस में थी, उसने ये कदम इसलिए उठाया क्योंकि टीचर्स लगातार मेंटल हरेस कर रहे थे। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की। आरोही से जुड़ा कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। स्कूल का सीसीटीवी फुटेज भी खंगाला जा रहा है। इसी से मिलती-जुलती कई घटनाएं नवंबर के महीने में हुईं- 1. राजस्थान: चौथी क्लास की अमायरा बिल्डिंग से कूदी 1 नवंबर को जयपुर के नीरजा मोदी स्कूल की चौथी मंजिल से कूदकर 9 साल की अमायरा ने सुसाइड किया। क्लास-4 की अमायारा को कई महीनों तक स्कूल में लगातार बुलीइंग किया जा रहा था। जिसमें उसके क्लासमेट्स से गाली-गलौज भी शामिल थी। अमायरा ने शिकायत की लेकिन सुना नहीं गया। 2. दिल्ली: टीचर TC देने की धमकी देकर इन्सल्ट किया 18 नवंबर को राजेंद्र नगर मेट्रो स्टेशन से कूदकर 16 साल के शौर्य ने सुसाइड कर लिया। उसके बैग में सुसाइड नोट मिला, जिसमें लिखा था- स्कूल टीचर्स के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि कोई और बच्चा ऐसी स्थिति में न आए। 18 नवंबर के दिन ही स्कूल में डांस की प्रैक्टिस कर रहा शौर्य स्टेज से फिसलकर गिरा। एक टीचर ने डांट दिया। उसके रोने पर दूसरे टीचर ने कहा- ‘रो लो जितना रोना है, मुझे फर्क नहीं पड़ता।’ तब हेडमिस्ट्रेस भी मौजूद थीं, पर किसी को नहीं रोका गया। 3. एमपी: कॉपी में लिखा- टीचर हाथ पकड़ता था 16 नवंबर को रीवा में एक प्राइवेट स्कूल की 11वीं क्लास की छात्रा ने फंदा लगा खुदकुशी कर ली थी। पुलिस को उसकी कॉपी में एक नोट मिला। जिसमें लिखा था- “शिक्षक मारते वक्त हाथ पकड़ लेता था। मुट्ठी बंद कर उसे खोलने को कहता था। कभी सजा के बहाने अंगुलियों में पेन डालकर दबाता।” परिवार का आरोप है कि छात्रा घर पर सामान्य थी, उसे स्कूल में प्रताड़ित किया गया। पिछले दो महीनों (अक्टूबर-नवंबर 2025) के दौरान देश कई हिस्सों से स्टूडेंट्स के सुसाइड के कई मामले सामने आए। जिनमें स्कूल और कोचिंग, दोनों तरह के छात्र शामिल हैं। NCRB-2023 की रिपोर्ट के मुताबिक, 2023 में लगभग 13,892 छात्र आत्महत्याएं दर्ज हुईं। जो कुल आत्महत्याओं का 8 प्रतिशत के आस-पास हैं। इनमें से सबसे ज्यादा प्रतिशत महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु जैसे राज्यों का है। इन हालिया मामलों से पता चलता है कि बच्चे मेंटल प्रेशर, डर, शर्मिंदगी और लगातार मिलने वाले हरेसमेंट और बुलिंग की वजह से सुसाइड कर रहे हैं। कई मामलों में यह हरेसमेंट मामूली दिखता है। जैसे क्लास में डांटना, मजाक उड़ाना, दोस्तों का बुली करना। लेकिन वही हरेसमेंट उसके भीतर घुटन, अकेलापन और सुसाइडल थॉट्स को लाता है। बच्चे की सेंस्टेविटी मेंटली परेशान करती है, जिसके बाद वह सुसाइड जैसे कदम उठा रहा है। बच्चों में बढ़ रहे सुसाइडल थॉट्स के 6 कारण पैरेंट्स से डिस्कनेक्शन: आजकल माता-पिता काम में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि बच्चों से बातचीत का समय ही नहीं निकल पाता। यह दूरी बच्चे को यह महसूस कराती है कि उसकी बातें, उसकी परेशानी प्रायोरिटी नहीं हैं। सेल्फ रिस्पेक्ट को लेकर इन्सिक्योरिटी: जब बच्चे की दूसरों से तुलना की जाती है, तो उसका आत्म-सम्मान धीरे-धीरे टूटने लगता है। उसे लगने लगता है कि वह दूसरों से कम है। बच्चे के अंदर गहरी चोट छोड़ देते हैं, और वह अंदर-ही-अंदर इनसिक्योर होने लगता है। डिप्रेशन और एंजायटी: अगर बच्चा लंबे समय तक लगातार इन्सल्ट, धमकी, या पिटाई झेलता है, तो वह स्ट्रेस की स्थिति में आ सकता है। यह तनाव डिप्रेशन, एंजायटी को बढ़ाता है। सुसाइडल आइडिएशन: बुलिंग से बच्चों की पढ़ाई पर नेगेटिव असर पड़ता है। उनकी एकेडमिक अपॉरच्युनिटी घटती है, स्कूल में पार्टिसिपेशन कम होता है। कभी-कभी ड्रॉपआउट का रिस्क भी बढ़ जाता है। हेल्पलेस इमोशंस: लगातार हरेसमेंट का सामना करने वाला बच्चा यह फील कर सकता है कि वह अपनी स्थिति बदलने में कैपेबल नहीं है। वह सोचने लगता है कि ‘मैं कुछ नहीं कर सकता’, ‘कोई मेरी बात नहीं सुनेगा’ और यह हेल्पलेस नेस उसे सुसाइड की ओर ले जाती है। लैक ऑफ सपोर्ट: बहुत बार बच्चा अकेला महसूस करता है। माता-पिता से इमोशनली दूर होने के कारण वह अपनी परेशानियों पर उनसे बात नहीं कर पाता। जब मैंटरिंग या इमोशनल सपोर्ट नहीं होता तब सुसाइडल थॉट्स आते हैं। यह जानना जितना जरुरी है कि समस्या क्यों हो रही है, उतना ही जरूरी है कि हम बचाव के उपाय पर भी ध्यान दें। साइकोलॉजिस्ट डॉ. सोनम छटवानी कहती हैं, बच्चा एक दिन में सुसाइड नहीं करता है। उसके पहले कई दिनों तक उसके अंदर सुसाइडल थॉट्स चल रहे होते हैं। इससे ऐसे डील कर सकते हैं- पैरेंट्स का रोज 5 मिनट का ओपन-टॉक रूल- घर पर खुलकर बातचीत हो। बच्चे के मूड, नींद, भूख या बिहेवियर में बदलाव दिखे तो पैरेंट्स तुरंत नोटिस करें और स्कूल से बात करें। स्कूल में काउंसलर: हर बड़े स्कूल में एक ट्रेंड काउंसलर होना चाहिए, ताकि बच्चे बुलिंग, डर, स्ट्रेस या किसी भी मानसिक परेशानी पर तुरंत बात कर सकें। बच्चों को ऐसा चैनल मिले जहां वे बिना डर अपनी शिकायत कर सकें। टीचर की सेंसिटिव ट्रेनिंग: टीचर सिर्फ पढ़ाने भर की भूमिका में नहीं। उन्हें सेंसिटिविटी, स्टूडेंट मेंटल हेल्थ और डी-एस्केलेशन की ट्रेनिंग मिले, ताकि वे बच्चों को शर्मिंदा या अपमानित करने से बचें। स्कूलों में बुलिंग, धमकाने और इंसल्ट पर जीरो टॉलरेंस हो। कम्युनिटी सपोर्ट सिस्टम: मेंटल-हेल्थ फर्स्ट-एड ट्रेनिंग, ऑन-कॉल काउंसलर और पैरेंट-एजुकेशन कैंप। ऐसे प्रोग्राम समुदाय को मजबूत करते हैं और बच्चों को सुरक्षित माहौल देते हैं। बच्चे का चुप हो जाना, नींद-खाने की आदतों में बदलाव, या उसकी बातों में होपलेस- ये सब तुरंत ध्यान देने लायक हैं। स्टोरी- उर्वशी मिश्रा —————– ये खबर भी पढ़ें… कहीं पैंट में बिच्‍छू डाला, कहीं मरने तक उठक-बैठक कराए: टीचर पीटे तो 10 साल तक सजा का कानून; साइकोलॉजिस्ट ने कहा-टीचर्स का साइकोमैट्रिक टेस्ट हो उत्तर-प्रदेश के सहारनपुर के एक स्कूल से बच्चे के साथ बर्बरता का मामला सामने आया है। मामला सहारनपुर के रामपुर मनिहारन क्षेत्र के चुनहेटी गांव के प्राथमिक विद्यालय का है। आरोप है कि लंच के बाद 7वीं क्लास के बच्चे फुटबॉल खेल रहे थे। खेल-खेल में बच्चों की फुटबॉल एक टीचर के बेटे को जा लगी। इससे टीचर नाराज हो गईं और बाल फेंकने वाले सातवीं के बच्चे को बेरहमी से पीट दिया। पढ़ें पूरी खबर…

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