प्रयागराज स्थित डॉ. राजेंद्र प्रसाद राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय ने पीएचडी की 5 सीटों के लिए आए 22 आवेदनों की जांच के बाद आठ आवेदन रद्द कर दिए। जांच में पता चला कि कई उम्मीदवारों की रिसर्च सिनॉप्सिस में एआई से तैयार मटेरियल का ज्यादा उपयोग किया गया था। विश्वविद्यालय ने यूजीसी के दिशानिर्देशों के अनुसार एआई इंडेक्स और सिमिलैरिटी की सीमा तय कर रखी थी। निर्धारित सीमा से ज्यादा पाए जाने पर आवेदन अयोग्य घोषित कर दिए गए। जांच में 36% आवेदन खारिज विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी सिनॉप्सिस की जांच टर्निटिन सॉफ्टवेयर के माध्यम से कराई। इस प्रक्रिया में एआई इंडेक्स और सिमिलैरिटी इंडेक्स दोनों की जांच की गई। कई आवेदनों में एआई से तैयार मटेरियल का स्तर 80% तक पाया गया, जबकि कुछ में सिमिलैरिटी इंडेक्स भी तय सीमा से काफी अधिक था। अब शेष 14 उम्मीदवारों को 12 अगस्त को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया है, जहां उनकी विषय की समझ, रिसर्च की मौलिकता और रिसर्च कैपेसिटी चेक की जाएगी। 6 महीने के अंदर दोबारा जमा करना होगी रिसर्च रिसर्च में एआई के बढ़ते उपयोग और साहित्यिक चोरी को रोकने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अनुसार अगर किसी थीसिस में 10 से 40% तक प्लेजरिज्म मिलता है तो उसे करेक्शन के लिए वापस भेजा जाएगा और रिसर्चर छह महीने के अंदर सुधार कर दोबारा जमा कर सकेगा। एआई का उपयोग थीसिस में करना जरूरी यूजीसी ने यह भी स्पष्ट किया है कि एआई का सीमित उपयोग किया जा सकता है, लेकिन इसका उल्लेख थीसिस में करना अनिवार्य होगा। सभी विश्वविद्यालयों को इन नियमों की जानकारी शोधार्थियों तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं। प्लेजरिज्म क्या है? पीएचडी रिसर्च में प्लेजरिज्म का अर्थ है किसी दूसरे व्यक्ति के विचार, रिसर्च, आर्टिकल, डाटा, फोटो या शब्दों को बिना उचित स्रोत दिए अपना बताकर प्रस्तुत करना। यह शैक्षणिक ईमानदारी का उल्लंघन है। इसके शोध की विश्वसनीयता पर सवाल उठता है। डिग्री रद्द हो सकती है। शोध-पत्र वापस (Retract) किए जा सकते हैं। यहां तक कि विश्वविद्यालय अनुशासनात्मक कार्रवाई कर सकता है। —————————————————— ये खबर भी पढ़ें रेलवे ग्रुप डी फिजिकल में 1,032 उम्मीदवार फेल:1000 मीटर की दौड़ सिलेक्शन की सबसे कठिन स्टेप, उमस भरे मौसम ने बढ़ाई परेशानी चिपचिपी गर्मी और उमस भरे मौसम में जहां ज्यादा देर चल पाना भी मुश्किल है। ऐसे मौसम में प्रयागराज के DSA ग्राउंड में 25 से 28 जुलाई तक रेलवे ग्रुप-डी PET परीक्षा की फिजिकल टेस्ट का आयोजन हुआ। इस टेस्ट के चलते 1,032 उम्मीदवार फेल हो गए। पांच दिनों तक चली फिजिकल टेस्ट उम्मीदवारों को भारी पड़ी। पूरी खबर यहां पढ़ें