68 की उम्र में साइकोलॉजी की पढ़ाई:कोल इंडिया के रिटायर्ड GM डॉ अशोक कुमार, इंसान के मन को समझने के लिए चुना ये सब्जेक्ट

आपने सुना होगा कि सीखने की ललक जिंदा हो, तो उम्र महज एक आंकड़ा बनकर रह जाती है लेकिन इस कहावत को रांची के 68 वर्षीय डॉ. अशोक कुमार ने न सिर्फ सच साबित किया है, बल्कि आज की युवा पीढ़ी के लिए एक नजीर भी पेश की है। कोल इंडिया में जनरल मैनेजर के पद से रिटायर हुए डॉ कुमार अब 68 साल की उम्र में साइकोलॉजी पढ़ रहे हैं। रोज कंधे पर बैग टांगकर कॉलेज जाते हैं डॉ अशोक वे रोज कंधे पर बैग टांगकर कॉलेज पहुंचते हैं, उन्हें देखकर क्लास के प्रोफेसर भी हैरान हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि मैं सिर्फ इसलिए डिग्री नहीं लेना चाहता कि मैंने एडमिशन लिया है। मैं असल में समझना भी चाहता हूं कि आखिर हमारा मन कैसे काम करता है। डॉ. अशोक किसी भी आम 20-22 साल के युवा छात्र की तरह हर दिन कंधे पर बैग टांगकर समय पर अपनी क्लास में पहुंचते हैं। देश के दिग्गज संस्थानों से पढ़ाई, जीएम पद से रिटायर्ड
डॉ अशोक ने कोल इंडिया में 33 साल तक काम किया और 2018 में जनरल मैनेजर के पद से रिटायर हुए। इसके बाद उन्होंने 2025 में दोबारा काम करने का मन बनाया। उन्होंने इंजीनियरिंग, मैन्यूफैक्चरिंग, सीमेंट से जुड़े ‘जेपी ग्रुप’ में वाइस प्रेसिडेंट और एडवाइजर के तौर पर काम करना शुरू किया। वहां से वे अक्टूबर 2025 में दूसरी बार रिटायर हुए। अपने एम्प्लोई को समझने के लिए जरूरी डॉ अशोक का मानना है कि किसी भी संस्थान में काम करने और अपने एम्प्लोई से काम कराने के लिए उनके व्यवहार को समझना बेहद जरूरी होता है। हर बॉस को संस्थान में साथ काम कर रहे एम्प्लॉई के कॉन्फिडेंस को बूस्ट करने का प्रयास किया जाए। इसके लिए साइकोलॉजी को समझना बेहद जरूरी है। इंसानी व्यवहार को जानने की जिज्ञासा आमतौर पर दो बार रिटायर होने के बाद लोग आराम की जिंदगी चुनते हैं लेकिन डॉ. अशोक के मन की जिज्ञासा शांत नहीं हुई। जब उनसे इस उम्र में दोबारा कॉलेज की बेंच पर बैठने की वजह पूछी गई, तो उन्होंने कहा- ‘इंजीनियरिंग ने मुझे जीवनभर बड़ी-बड़ी मशीनें, पुर्जे और उनकी वर्किंग थ्योरी समझना सिखाया। अब मेरी जिज्ञासा इंसानी व्यवहार को जानने की है। मैं मनोविज्ञान के जरिए ये समझना चाहता हूं कि इंसान कैसे सोचता है, उसका मन कैसे काम करता है। मेरे लिए सीखना कभी न खत्म होने वाली प्रक्रिया है।’ पत्नी भी साथ पढ़ना चाहती थीं, लेकिन एडमिशन नहीं ले सकीं
वे कहते हैं कि इस फैसले से उनके परिवार या दोस्तों को कोई समस्या नहीं है बल्कि उन्होंने हमेशा मेरा मनोबल बढ़ाया और साथ दिया है। डॉ अशोक ने बताया कि उनकी पत्नी भी पोस्ट ग्रेजुएशन में एडमिशन लेना चाहती थीं लेकिन पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते वो एडमिशन नहीं ले पाईं। वे कहते हैं कि वे क्लास में खुद को एक स्टूडेंट की तरह ही देखते हैं, न कि किसी पूर्व अधिकारी की तरह। डॉ अशोक मूल रूप से बिहार के खगड़िया के रहने वाले हैं। उन्होंने अपनी पढ़ाई की शुरुआत में फिजिक्स ऑनर्स में एडमिशन लिया था। लेकिन उसे बीच में ही छोड़ दिया। लेखक- वरुण विश्वकर्मा ——————————- ये खबर भी पढ़ें.. MBBS की 800 से ज्यादा सीटों पर कोई एडमिशन नहीं:एक्सपर्ट- सालाना फीस 25 लाख तक, इसीलिए स्टूडेंट्स NEET काउंसलिंग में हिस्सा नहीं ले रहे NEET UG 2026 काउंसलिंग हाल ही में पूरी हुई है। मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) के डेटा के मुताबिक कॉलेज-वाइज स्ट्रे वैकेंसी राउंड यानी आखिरी काउंसलिंग के बाद भी तमिलनाडु, पुडुचेरी और कर्नाटक में 800 से ज्यादा सीटें खाली रह गई हैं। पूरी खबर पढ़ें..

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